मुख्य बातें
- झारखंड में कमर्शियल गैस और छोटू सिलेंडर की कीमतों में वृद्धि से छात्रों की परेशानी बढ़ी।
- रांची में पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों को महंगे खाने की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
- गैस की कीमत 250 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है, जिससे छात्र प्रभावित हैं।
- छात्रों को समय पर भोजन नहीं मिल पा रहा, जिससे पढ़ाई पर असर पड़ रहा है।
झारखंड में कमर्शियल गैस और छोटू सिलेंडर की कीमतों में वृद्धि ने रांची में पढ़ाई कर रहे छात्रों के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं। खासकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को इस महंगाई का सामना करना पड़ रहा है। गैस की कीमतें 250 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई हैं, जिससे छात्रों को भोजन बनाने में कठिनाई हो रही है।
छात्रों की बढ़ती चिंताएं
रांची के लालपुर इलाके में स्थित कृष्णा लॉज में रहने वाले छात्र अब सुबह का नाश्ता छोड़कर ब्रेड और केले पर निर्भर हो गए हैं। सोनू कुमार साहू, जो हजारीबाग से हैं, ने बताया कि उनके पिता दर्जी हैं और उन्हें रांची में पढ़ाई के लिए पैसे भेजते हैं। लेकिन गैस की बढ़ती कीमतों के कारण वह मेस या टिफिन का महंगा खाना नहीं खरीद सकते।
महंगे खाने की समस्या
कमर्शियल गैस की कीमतों में वृद्धि के कारण मेस और टिफिन सिस्टम में दो जून के खाने का चार्ज लगभग 6000 रुपये हो गया है। छात्रों को गैस भरवाने के लिए घंटों लाइन में खड़ा होना पड़ता है। आशीष कुमार, जो पलामू से रांची आए हैं, ने बताया कि गैस के दाम बढ़ने से हर चीज महंगी हो गई है।
भोजन की समय पर उपलब्धता
छात्रों का कहना है कि अगर सुबह गैस खत्म हो जाती है, तो उन्हें दोपहर का भोजन नहीं मिल पाता। ऐसे में शाम को ही खाना बनाना संभव हो पाता है। रामगढ़ से पढ़ाई करने आए अन्य छात्रों ने भी इसी समस्या का जिक्र किया।
आगे की स्थिति
छात्रों की इस समस्या का समाधान निकालना आवश्यक है, ताकि वे अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर सकें। गैस की कीमतों में स्थिरता और उचित खाद्य व्यवस्था की आवश्यकता है, ताकि विद्यार्थियों को इस कठिनाई का सामना न करना पड़े।












