मुख्य बातें
- ईरान के विदेश मंत्री ने अमेरिका-ईरान वार्ताओं को लेकर मीडिया रिपोर्ट्स को खारिज किया।
- बातचीत में नई राजनीतिक बाधाओं के कारण प्रगति की उम्मीदें कम हुई हैं।
- ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर कड़े प्रावधानों की मांग की है।
- समझौते को लेकर महत्वपूर्ण मतभेद अभी भी बने हुए हैं।
मध्य पूर्व में तनाव को कम करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच चल रही कूटनीतिक वार्ताओं में नई चुनौतियाँ सामने आई हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने वाशिंगटन और तेहरान के बीच चल रही बैक-चैनल वार्ताओं को लेकर मीडिया में आ रही अटकलों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच संदेशों का आदान-प्रदान जारी है, लेकिन किसी भी अंतिम नतीजे पर पहुंचने से पहले की खबरें केवल अफवाहें हैं।
बातचीत में नई अनिश्चितता
अराघची ने ईरानी मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि दोनों पक्षों के बीच संवाद जारी है, लेकिन किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले चल रही खबरें केवल अटकलें हैं। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब वाशिंगटन में नई राजनीतिक बाधाओं के कारण किसी बड़ी सफलता की उम्मीदें कम हो गई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में संकेत दिया था कि ईरान के साथ समझौता पूरा होने के करीब है, लेकिन उन्होंने मसौदा प्रस्ताव में बदलाव करने की मांग की है।
व्हाइट हाउस की बैठक का परिणाम
ट्रंप ने एक हफ्ते पहले समझौते को “काफी हद तक अंतिम रूप दिया गया” बताया था, लेकिन व्हाइट हाउस में वरिष्ठ सलाहकारों के साथ बैठक बिना किसी निर्णय के समाप्त हो गई। अमेरिकी अधिकारियों ने क्षेत्रीय तनाव कम करने और ईरान की परमाणु गतिविधियों पर व्यापक बातचीत के लिए प्रगति की ओर इशारा किया था, लेकिन ताज़ा घटनाक्रम से यह स्पष्ट होता है कि दोनों पक्षों के बीच महत्वपूर्ण मतभेद बने हुए हैं।
मुख्य विवाद: परमाणु कार्यक्रम और आर्थिक राहत
ईरान के परमाणु कार्यक्रम और आर्थिक शर्तों पर सबसे बड़े मतभेद हैं। ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका ईरान के यूरेनियम भंडार पर नियंत्रण चाहता है, जबकि ईरान का कहना है कि परमाणु ढाँचे के विवरण पर चर्चा मौजूदा बातचीत का हिस्सा नहीं है। आर्थिक मुद्दे भी जटिल बने हुए हैं, क्योंकि तेहरान किसी भी समझौते में प्रतिबंधों में राहत और आर्थिक गारंटी की मांग कर रहा है।
होरमुज़ जलडमरूमध्य का मुद्दा
होरमुज़ जलडमरूमध्य भी एक महत्वपूर्ण अड़चन है। वाशिंगटन इस रणनीतिक जलमार्ग से बिना किसी रुकावट के आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए और अधिक मजबूत प्रतिबद्धताएँ चाहता है। इस पर चर्चा जारी है कि ऐसी गारंटियों को समझौते में किस तरह शामिल किया जाए।












