भारत-चीन सीमा पर वार्ता और सहयोग के प्रयास
भारत और चीन के बीच सीमा मामलों को लेकर परामर्श और समन्वय कार्य तंत्र (डब्ल्यूएमसीसी) की 35वीं बैठक में दोनों देशों ने सीमा से जुड़ी विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। इस बैठक में परिसीमन, सीमा प्रबंधन, तंत्र निर्माण और सीमा सहयोग से संबंधित विषयों पर विचार-विमर्श हुआ। भारतीय प्रतिनिधि ने सीमा पार नदियों के मुद्दे पर अगली विशेषज्ञ स्तरीय बैठक जल्द आयोजित करने का आग्रह किया। दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए कि सीमा पार नदियों से जुड़े सभी समझौतों को आगे बढ़ाना आवश्यक है और इसके लिए दोनों मिलकर मजबूत तैयारी करेंगे, जो अब चीन में होने वाली अगली बैठक में होगी।
सीमा विवाद और द्विपक्षीय संवाद की दिशा
सीमा पर चल रही वार्ताओं के दौरान दोनों देशों ने सीमा पार नदियों पर सहयोग बढ़ाने का संकल्प लिया है। भारतीय पक्ष ने इस दिशा में ठोस कदम उठाने का आश्वासन दिया है। इसके साथ ही, सीमा से जुड़े मुद्दों पर सकारात्मक संवाद और सहयोग को प्रोत्साहित किया गया है। इस संदर्भ में, पश्चिम बंगाल में सीमा फेंसिंग के लिए ग्रामीणों ने बीएसएफ (Border Security Force) को अपनी जमीन सौंप दी है। चीन के बीजिंग (Beijing) में महिला एवं बाल विकास परिषद (WMMC) की बैठक भी हुई, जिसमें भारत ने अपने रुख को स्पष्ट किया। आने वाले दिनों में जैसे-जैसे प्रगति होगी, हम आपको ताजा जानकारी प्रदान करते रहेंगे।
कश्मीर, पाकिस्तान और चीन के साथ भारत का दृष्टिकोण
कश्मीर मुद्दे पर भारत ने अपना आधिकारिक रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि यह क्षेत्र भारत का अभिन्न हिस्सा है और रहेगा। चीन और पाकिस्तान के संयुक्त बयान पर भारत ने कड़ा विरोध जताया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत ने इस मामले में अपना जवाबी बयान जारी किया है और इस मुद्दे को अलग से देखा जाना चाहिए। वहीं, विश्व परिषद सम्मेलन (WMCC) का विषय पूरी तरह से स्वतंत्र है।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ 23 से 26 मई तक चीन के दौरे पर हैं, जहां उन्होंने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की। इस दौरान दोनों देशों ने जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाया, जिसे चीन ने पुराना बताया और इसे संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों और द्विपक्षीय समझौतों के अनुसार हल करने का आग्रह किया। भारत ने इस संयुक्त बयान को खारिज करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अविभाज्य हिस्सा हैं और रहेंगे। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि भारत ने चीन और पाकिस्तान के संयुक्त बयान में की गई अनावश्यक टिप्पणियों को पूरी तरह अस्वीकार किया है।












