महाराष्ट्र के हिंगोली में एंबुलेंस की देरी से महिला की मौत
महाराष्ट्र के हिंगोली जिले में एक महिला की मौत उसकी अजन्मी बच्चे के साथ हो गई, जब उसे अस्पताल पहुंचाने के लिए आवश्यक सरकारी एंबुलेंस समय पर नहीं पहुंच सकी। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल ने डीजल की कमी का हवाला देते हुए एंबुलेंस भेजने से इनकार कर दिया। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है।
परिजनों का आरोप और अस्पताल की स्थिति
पीड़ित परिवार के अनुसार, हिंगोली के जवाला बाजार क्षेत्र में महिला को प्रसव पीड़ा शुरू हुई। उन्होंने तुरंत सरकारी एंबुलेंस के लिए संपर्क किया, लेकिन उन्हें लगभग दो घंटे तक इंतजार करना पड़ा। जब स्थिति गंभीर हो गई, तो परिजनों ने एक प्राइवेट वाहन का सहारा लिया और महिला को हिंगोली के सरकारी मेडिकल कॉलेज पहुंचाया। वहां डॉक्टरों ने सिजेरियन ऑपरेशन किया, लेकिन बच्चे को बचाया नहीं जा सका।
प्रशासन का जवाब और जांच का आश्वासन
महिला की मां ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा, “हम गरीब हैं, और ऐसी आपातकालीन स्थिति में हम तुरंत प्राइवेट वाहन कैसे जुटाते? अस्पताल ने साफ मना कर दिया कि डीजल नहीं है। यदि मेरी बेटी को कुछ हो जाता, तो जिम्मेदारी किसकी होती?” परिजनों का यह भी कहना है कि जब महिला की हालत बिगड़ रही थी, तब उन्होंने 108 और 102 नंबर पर फोन किया, लेकिन कर्मचारियों ने कहा कि गाड़ी में ईंधन नहीं है।
वहीं, जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. कैलास शेलके ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि एंबुलेंस में डीजल मौजूद था, लेकिन ड्राइवर छुट्टी पर था। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक जांच में पता चला है कि संबंधित अधिकारी ने समय पर वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की। जिला कलेक्टर ने भी इस मामले में कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
विपक्ष ने इस घटना को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं। एनसीपी (शरद पवार गुट) की महिला प्रदेश अध्यक्ष ने पूछा कि जब सरकार कहती है कि ईंधन की कोई कमी नहीं है, तो फिर इस मौत के लिए किसे जिम्मेदार ठहराया जाए। स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबीतकर ने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।












